मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड वीसावा (शिवकालीन घराणी)

लेखांक १२६                                                                                                                                  १५९० श्रावण वद्य ८

                                                                                             

2 1 स्वस्ती श्रीशके १५९० कीलक संवत्सरे श्रावण वदी अस्टमी बुधवार तदीनी बीहुजूर राजश्री केसवजी नाईक देसमुख पा। वाई सु॥ तिसा सितैन अलफ कारणे लिहिले निर्णयपत्र ऐसे जे वेदमूर्ती नरसीहभट चित्राउ यामधे व वेदमूर्ती नारायणभट बिन एकनाथभट व शकरभट चित्राउ सो। का। वाई यामधे इनामाचा गरगशा होता यावरी नरसीहभटा +++ येउनु ++++ वर्तमान सागितले की आह्मास वडीलाचे कस्टे करून जमीन चावर दीड बि॥

मौजे बोरखल सा।                                 मौजे किण्हई सा। कोरागाउ
नीब चावर १305                                     चावर ..

एणेप्रमाणे चालत असे त्याचे विभाग होउनु सदरहु जण यथा अशे खात आलो हाली अवघे जण वेगळाले नादत असता आपण अपुले कस्टे करून इनाम सदरहू दीड चावराचे पटीया + + + बपेसजी दस्तीबाद नव्हत्या ते बाद करून घेतले ह्मणौन बापभाउ करकर करून पटी बाद कली आहे त्याचे तकसीर सागताती तरी याचे निरणय केला पाहिजे + + + + + + + + + + + + का। माडोगणीचे समस्त + + बोलाउनु ब्रह्मसभा करून निवाडा धर्मता पाहाता धर्मशासत्र विज्ञानेस्वर ग्रथ आणुन पाहाता वडीलाचे वृत्ती जे आहे ते वाटून घेउनु वेगलाले नादताती आणि तीही वृत्तीवरी आपुल्या कस्टे करून जे मेलवीले असेल त्यास वरकडावाटे करायासी समध नाही ते ज्याने मेलविले असेल त्याणे च घेवे ऐसे लिहिले आहे व हिसेबी गोतरी तिही विचारून पाहाता वेगलाले नादताती त्यास अपुल्या कस्टे मेलवितील त्यास दुसरीयास वाटा द्यावयास काय गरज आहे ऐसी धर्मशास्त्रीची हि आज्ञा + + + की नरसीहभटानी अपुले + + ज्या पटिया इनामास बाद केल्या आहेती त्यास नरसीहभटाचे + + अगर चुलत्यास अगर पुतण्यास व गोत्रजास वाटा मागावयास समध नाही नरसीहभटी च अपुले पुत्रपौत्री खाउनु सुखे असावे ऐसा निरणय जाहाला हे पत्र सत्य

खंडपत्र पसर्णी

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