मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड वीसावा (शिवकालीन घराणी)

कल्याण-जोशी

लेखांक १९१                                                                     श्री                                                                  १६१८ वैशाख शुध्द १२                             
राजश्री हवालदार व कारकून ता। वाडे गोसावी यांसि
2 1 अखंडित लक्ष्मी अलंकृत राजमान्य स्नो। नारो दामोदर सुभेदार व कारकुन सुभा प्रांत जुनर सु॥ सीत तिसैन अलफ राजश्री                 पंतसचीव स्वामीचे आज्ञापत्र छ १६ साबानीचे पौ। जाले तेथे आज्ञा की वेदमूर्ती राजश्री रामज्योतिषी मौजे बोरगाव ता। हवेली सुभा दाभोल ब्राह्मण योग्य आहेती स्नानसध्या करून माहाराज राजश्री               स्वामीस आशीर्वाद देताती याचा योगक्षेम चालिला पाहिजे राजगृहीहून अन्न पावोन स्नानसध्या करून सुखरूप राहिले या राजश्री                स आशीर्वाद देतील येणेकरून राज्याचे कल्याण आहे हे जाणुन वेमुर्तीस मौजे तोरणे ता। मा। नुतन इनाम देह १ कुलबाब कुलकानु निधि निक्षेप जळतरुपाषाण सहित पडिलेपान खो। हकदार इनामदार करून दिल्हा आहे तरी मौजे मा। ज्योतीषी याचे स्वाधीन करून यास व याचे पुत्रपौत्रादि वौशपरंपरेने चालवणे ह्मणुन आज्ञा आज्ञेवरून वेदमूर्तीस नूतन इनाम मौजे मा। कुलबाब कुलकानु निधिनिक्षेप जलतरुपाषाण पडिलेपान खेरीज हकदार इनामदार करून दिल्हा आहे तरी मौजे मा। वेदमूर्ती ज्योतिषी याचे दुमाला करून यास व याचे वौशपरंपरेने इनाम चालवीत जाणे प्रतीवर्षी नूतन पत्राची आपेक्षा न करणे प्रती लेहून घेऊन मुख्य पत्र भोगवटेयानिमित्य ज्योतिषी याजवल परतोन देणे रा। छ १० शौवाल मोर्तब सूध

                              29 1

 191

Joomla! Debug Console

Session

Profile Information

Memory Usage

Database Queries