मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[२१४]                                                                       श्री.                                                                                                   

राजश्रियाविराजितराजमान्यराजश्री बाबूराव गोसावी यांसी :-
पोष्य बाळाजी बाजीराव प्रधान नमस्कार विनंति उपरी येथील कुशल जाणोन स्वकीय कुशल लिहीत जाणें. विशेष. खासा स्वारी हिंदुस्थानास येते. बैल प्रांत झांशी वगैरे येथील ऐवजीं खरीदी करून पाठविणें. बैलाचे तरतुदीस हैगई न करणे. खासा स्वारी समागमें नबाब निजामअल्लीखानसहवर्तमान नर्मदातीरास सत्वर येऊन पोहोंचणार. तर बैल लवकर लिहिल्याप्रमाणें खरिदी करणे. सर्वत्र वर्तमान प्रकट करणें की दरमजल निजामअल्लीसुध्दां मार्गशीर्षात येतों, देखील जानोजी भोसले. गोविंद बल्लाळ यास वर्तमान प्रविष्ट करणे. नारो शंकरास प्रविष्ट करणें. बुंदेलखंडचे राजे, कमाविसदारांस वगैरे जरूर वर्तमान खासा स्वारी, निजामअल्लीसुध्दा, भोसले पन्नास हजार फौज, र्गशीर्षात येते, नवरी कोट पावली. तुह्मी...



[२१५]                                                                       श्री.                                                                           १४ फेब्रूवारी १७४१.                        

पै॥ फाल्गुन वद्य १०
छ २३ जिल्हेज.

तीर्थस्वरूप सौभाग्यवती आकाबाई वडिलाचे सेवेसी :-
अपत्यें विसाजी गोविंद साष्टांग नमस्कार विनंति येथील कुशल त॥ फाल्गुन शुध्द १० जाणून मु॥ अर्काट क्षेमरूप असो. विशेष. श्रीमंत यजमानसाहेब व तीर्थस्वरूप समस्त त्रैतनापल्लीस मोर्चे लावून बैसले आहेत. समस्त सुखरूप आहेत. चिरंजीव व जावई सर्व मंडळी क्षेम असेत. कांही चिंता न कीजे. यानंतर श्रीमंत राजश्री कृष्णाजी नाईक जोशी याजकडून ५०००० रुपये देविले आहेत ते वडिली घेऊन पावलियाचें उत्तर पाठवणे. वडिली सदैव आशीर्वादपत्र पाठवून सांभाळ केला पाहिजे. बहुत काय लिहिणें. कृपालोभ असो दीजे. हे विनंती.

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