मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[४७०]                                                                  श्रीलक्ष्मीकांत.                                                     २५ फेब्रुवारी १७५६.

पौ फाल्गुन वद्य १२
शनवार शके १६७७ युवानाम.

वेदशास्त्रसंपन्न राजश्री वासुदेवबावा दीक्षित स्वामीचे सेवेसी :-
सेवक जानोजी भोसले सेनासाहेब सुभा दंडवत विनंति उपरि येथील कुशल जाणून स्वकीय कुशल लिहित असलें पाहिजे. विशेष. स्वामींनीं पत्र पाठविलें तें प्रविष्ट होऊन लेखनार्थ अवगत जाहला. वेदमूर्ति राजश्री शिवभट साठे यांजकडील पत्र काशिदाबराबर पाठविलें तें प्रविष्ट होऊन त्याचें प्रत्योत्तर लेहून आपणाकडे पाठविलें आहे. तें सत्वर वेदमूर्तीकडे पावतें केलें पाहिजे. निरंतर स्वामींनीं आशीर्वादपत्रीं सेवकांचा परामृश करीत असावें. र॥छ २४ माहे जमादिलावल. सेवेसी श्रुत होय हे विज्ञापना.

Joomla! Debug Console

Session

Profile Information

Memory Usage

Database Queries