मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[५६४]                                                                        श्री.                                                                      २६ मार्च १७५७.

वेदशास्त्रसंपन्न राजमान्य राजश्री वासुदेव दीक्षित स्वामीचे सेवेसी.
विद्यार्थी शिवभट साठे कृतानेक साष्टांग नमस्कार विनंति उपरि येथील कुशल तागाईत चैत्र शुध्द ७ मुक्काम नजीक अंबडापूर श्रीमंत सेनेसहवर्तमान यथास्थित असे. विशेष. दर्शन जालियावर येथील प्रसंग अवलोकन करितां 'बालो राजा निरक्षरो मंत्री' याप्रकारें असे. ऐसियास, उदयीक मुक्काम प्रतिष्ठानीं प्रविष्ट जालियावर वर्तणूक वर्तमान अवलोकन करून तुह्मास लेखन करिजेल. प्रस्तुत सैन्य अधिकारी सहवर्तमान बुभुक्षित दिसतात, ऐसा विचार असे. विशेष. तपोनिधि हंसपुरी महंत सातारियास गेले असत, व रा. बाबूराव कोन्हेर चिरंजीवाचे व्रतबंधास्तव घरास गेले असत. उभयता मशार्निले आलिया वितरिक्त कांहीं कामकाज विलेस लावावयाचें श्रीमंतांचे मनोदयीं नाहीं, व कितेक गोष्टीस महंत मध्यवर्ती असत, यास्तव आह्मींही कांहीं उपक्रम करीत नाहीं. हे विनंति.

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