मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड आठवा (१६४९-१८१७)

[ १९२ ]                                        श्री.                                            १७७४.                                                                                                                       

राजश्रियाविराजित राजमान्य राजश्री पांडुरंगराव स्वामीचे सेवेसीः -
पो। मोरो बाबूराव रा। नमस्कार विनंति उपरि येथील कुशल जाणोन स्वकीय कुशल लिहित जावें विशेष राजश्री मुरारराव हिंदुराव घोरपडे ममलकत मदार सेनापति यांहीं सरदेशमुखी व इनामगांव मातु श्री आई साहेब यांचे विद्यमाने गाहाण ठेविलें. कराराप्रों। ऐवजही घेतला. हल्ली वर्षें जबरदस्तीनें सरकारात वसूल घेतात. हें वर्तमान विदित झालियावर हुजूरचीही पत्रे तुह्मास आहेत त्याप्रों। मागील भोगवटेयाप्रमाणें व सरकारचे पत्राचे अन्वये यांजकडे सुरळीत चाले तो अर्थ करावा मा। निल्हेकडून रा. गोविंद बाबुराव कारकून पत्रें घेऊन आले आहेत हे आपणास तेथील कच्ची वहिवाट समजावितील. त्याप्रों। बंदोबस्त करून द्यावा कारकून मानिल्हेस आपणाजवळ ठेऊन हरएकविसीं फिरोन बोभाटा न येई तें करावें बहुत काय लिहिणें. लोभ कीजे हे विनंति.

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