मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड आठवा (१६४९-१८१७)

[ ३३ ]                                       श्री.                                                        ३० जुलै १६७७.

श्री
शिवचरणी तत्पर
त्र्यबकसुत मोरेश्वर

स्वस्ति श्री राज्याभिषेक शक ४ पिंगलनाम संवत्सरे श्रावण शुद्ध एकादशी इदुवासरे क्षत्रियकुलावंतस श्रीराजा शिव छत्रपति याणीं नागोजी भोसले मुद्राधारी कोट उटळूर यासी आज्ञा केली ऐसी जे - स्वामी तुह्मावरी कृपाळू होऊन कोटमजकुरीचा हवाला देऊन सरजामी केली व एक मराठी नाईकवाडीहि देऊन सरजामी केली येणेप्रमाणे बितपशिलः -

खासा तुह्मी नागोजी भोसले   
हवालदार कोटमजकूर सालीना तैनात 
वराह पादशाही १५० 
एक खासा चाकर दोन एकूण 

 

कृष्णाजी सुरेवंशी पेशजी चाकर
रा। हालीं कोटमजकुरीची सरनोबती
देऊन तैनात सालीना
होन पा। १००

१२५                               २५      लग----------------- 
एकूण असामी ३ तीन रास. यांसी तैनात वराह पा । सालीना होन अडीचशे दो रास. व दर माहे तैनात वराह पा । तीन रास. ई ।। पैवस्तगीपासून वजा वाटा उरवेषी वजा करून बाकी बेरीज माहे दर माहे आदा करीत जाणें. व याखेरीज तुह्मास हुजूर पोता वाटणी पावली वितपशीलः -

खासा हवालदार वाटणी बेरीज  
होन कावेरी              फुलम
पाक होन                चंजावरी
११                        २०
सोनजी रायाजी चव्हाण
नाईकवाडी वाटणी माहे दोनी
एकूण     कावेरी पाक
होन      ६

कृष्णाजी सुरेवंशी सरनोबत यासी
वाटणी कावेरपाक वराही ८
लग                       ०

एकूण वराह कावेरीपाकी पंचवीस रास व फुलम वीस रास पावले असेत बाकी वजा करणें मजुरा असे लेखनसीमा.

मर्यादेय
विराजते

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