संस्कृत भाषेचा उलगडा

लट्, लुट्, लृट् आत्मने

त् हे बैजिक सर्वनाम धातूंना लागते. सामीप्य ऊर्फ नैकट्य ऊर्फ स्वीयत्व दाखविणारा ए प्रत्यय लागून ते असे रूप होते. नंतर एकवचनी अ, द्विवचनी आ किंवा ए आणि त्रिवचनी अन् उपसर्ग लागतो. एकवचनी उपसर्ग न लागता, नुसते ते असेही रूप रहाते. त्रिवचनी अन् उपसर्ग न लागता फक्त प्लुत अ ३ लागतो.



अपच् धातु :        अपच् + अत =अपचत
                        अपच् + अताम् = अपचताम्
                        अपच् + अन्त = अपचन्त

अबिभृ धातु :       अबिभृ + त = अबिभृत
                        अबिभृ + आताम् = अबिभ्रातम्
                        अबिभृ + अ ३ त = अबिभ्र ३ त

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