मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड एकवीसावा (शिवकालीन घराणी)

लेखाक १३१

श्री कृष्णाककुद्मतीप्रसन्

स्वस्तिश्रीमत्सकलगुणालंकरण गोब्राह्मणप्रतिपालक राजमान्य राजश्री दादोपत प्रभुवर्येषु आश्रित समस्त ब्राह्मण क्षेत्र कराड कृतानेकवेदोक्त अनेक आसीर्वाद विनती उपरी आह्मी येतेसमई राजश्री पाराजीपत याचे दर्शन घेऊन आलो तेव्हा ते बोलिले की श्रीमताकडे जाऊन ताकीदपत्रे घेणे त्यावरून पुण्यास आलो श्रीमताचे दर्शन घेऊन सविस्तर वर्तमान विदित केले त्यावरून आपणास पत्र घेऊन पाठविले आहे गाव बितपसील ईनाम
१ श्रीपावकेश्वर मौजे कालवडे                     १ मौजे टाळगाव बो। राजश्री
१ मौजे सैदापूर समस्त ब्राह्मण                    नारायेण दीक्षित गिजरे
क्षेत्र मजकूर                                           १ मौजे पाचुंद समस्त ब्राह्मण क्षेत्र
१ मौजे वाराजी वेदमूर्ती राजश्री                   क्षेत्र मजकूर
बापाजी कासीकर यास                            १ मौजे पाचमोरी बाबा दीक्षित
१ मौजे नडसी हा गाव वेदमूर्ती                   गिजरे यास
वासुदेवभट क्षीरसागर                              १ मौजे जिती बालकृष्ण दिक्षीत
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४                                                        उबराणी
५ तेरीज                                               १ मौजे सेणे नरसिभट लाटकर
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९                                                        ५

येणे प्रमाणे देह नव पा। कराड याचे चौथाई आह्माकडे दिल्ही त्याप्रमाणे सदरहू गावचे चौथाईचा वसूल जाहाला त्याप्रमाणे मखतियात मजुरा देऊ ह्मणून राजश्री बाबूराव रघुनाथ यास हि पत्र दिल्हे आहे हे वर्तमान आपणास कळावे आणि गावगना उपद्रव जाहला असेल तो मना करावा ह्मणून आपणास पत्र पाठविले आहे आह्मास च्यार दिवस लग्नाकरिता राहून घेतले ह्मणून राहिलो तरी गावगना काही उपद्रव न होय तो अर्थ करावा येतेसमई आपले दर्शन घेऊन जाऊ देशमुखी व सरदेशमुखीचा आमलाचा बहूत उपसर्ग जाहला आहे ह्मणून ऐकिले त्यास पेसजी आमलदार घेत होते त्याची पत्रे आह्माकडे आहेत त्याप्रमाणे आह्मी आल्यावर निकाल होईल तूर्त दोहीअमलाचा उपसर्ग न होय ते करावे सर्वप्रकारे ब्राह्मणाचे अगत्य आपणास आहे तेथ विशेष काये लिहिणे आह्मी सत्वरीच येतो बहुत काय लिहिणे हे अशिर्वाद

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