मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[४२४]                                                                        श्री.                                                      ११ फेब्रुवारी १७५३.

पै॥ फाल्गुन शुध्द १ मंगळवार
शके १६७४ अंगिकारनामसंवत्सरे.

वेदमूर्ति राजश्री वासुदेव दीक्षित स्वामीचे सेवेसी :-
विद्यार्थी बाळाजी बाजीराऊ प्रधान नमस्कार विनंति. चिरंजीव दादास पत्र पाठविलें आहे, हें जलदीनें प्रविष्ट करून उत्तर पाठवावें. येथील वर्तमान तर किरकोळ कामें कांही जाहली. मोठी आशा श्रीरंगपट्टण बिदनूरची आहे. स्वामीचें आशीर्वादें लोभ होईल त्याप्रमाणें मोगलाकडील वर्तमान नवलविशेष लिहित असावें. छ ७ रबिलाखर मु॥ नजीक अनेगोंदी हे विनंति.

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