मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[४२८]                                                                        श्री.                                                            १४ मे १७५३.

पै॥ वैशाख शुध्द १२
सोमवार शके १६७५.

वेदशास्त्रसंपन्न राजमान्य राजश्री वासुदेव दीक्षित स्वामीचे सेवेसी :-
विद्यार्थी बाळाजी बाजीराव प्रधान नमस्कार विनंति उपरि येथील कुशल जाणोन स्वकीय कुशल लेखन केलें पाहिजे. यानंतर आपणांकडून सांप्रत आशीर्वादपत्र येऊन वर्तमान अवगत होत नाहीं. तरी निरंतर पत्र पाठवून कुशलार्थ लिहीत असावें. येथील वर्तमान तर, बिदनूरची खंडणी विल्हेस लागली. थोडा बहुत गुंता आहे, तो एक दोन दिवशीं विल्हेस लागेल. उपरांतिक सावनूर व सोंधे विल्हेस लावून देशी येऊं. सर्वही स्वामीचे आशीर्वादें उत्तमच होईल. बहुत दिवस पत्र येत नाही ऐसें नसावें. हे विनंति.

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