मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड तिसरा ( १७०० -१७६०)

[४०४]                                                                       श्री.                                                                ११ जुलै १७५२.

पै॥ आषाढ वद्य ११ शनवार शके १६७४.

वेदमूर्ति राजश्री वासदेवभट दीक्षित स्वामीचे सेवेसी :-
विद्यार्थी बाळाजी बाजीराव प्रधान कृतानेक नमस्कार विनंति उपरि येथील कुशल जाणून स्वकीयें कुशल लेखन केलें पाहिजे. विशेष. पहिलें पत्र खानास तुमचे मार्फतीनें पाठविलें होतें, तें त्यांस प्रविष्ट होऊन त्याचें उत्तर आलें. वर्तमान अवगत जालें. प्रस्तुतही आणीक तुह्मीं पहिल्याअन्वयें त्यास लिहून जाब आणूनआह्मांकडे पाठविणें. वरकड हकीकत वर्तमानें माहितगिरी राखून वरचेवर लिहून पाठवीत जाणें. बहुत काय लिहिणें. हे विनंति.

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