मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने खंड एकवीसावा (शिवकालीन घराणी)

लेखाक २३० ,
१७७९ आषाढवद्य ७ नकल

श्रीशंकर 

सिका

श्रीमच्छकराच्यार्यान्वयसजाताभिनवश्रीविद्याशकरभारतीस्वामीकर-'' कजोद्भवश्रीविद्यानरसिहभारतीस्वामीकृतनारायणस्मरणानि
वेदशास्त्रसपन्न राजमान्य राजश्री नाना दीक्षित व सीताराम दीक्षित उमराणी मौजे पाल परमशिष्योत्तम यासी विशेषस्तु तुमचें कल्याण इच्छित श्री निकट असो अत्रत्य कुशल जाणून स्वकीय लेखनी मानस सतोषवीत असले पाहिजे. तदनतर तुह्मास सस्थानातून मठाधिपत्याची वहिवाटीची आज्ञा होऊन आज्ञापत्र दिल्हे त्यात पाल वगैरे क्षेत्रकरहाटक याचे हद्दीतील आहेत ती न पाहणेची आज्ञा व्हावी या प्रो। क्षेत्रस्त ब्रह्मवृद यानी समक्ष मठ सकेश्वर मुकामी श्रुत केले वरून हे आज्ञापत्र सादर जाहले असे तरी पाल वगैरे गाव क्षेत्रकरहाटक याचे हद्दीतील गाव रहित केली असती तेथील मठाधिपत्य वगैरे तुह्मी पाहू नये विशेष लिहिणे ते काय आषाढवा॥ ७ निशान मोर्तब

असल बरहुकूम नकल                     रामचद्र बापूजी कारकून नि॥ श्री
                                                  शेरा
अजमितीचे पत्राबरोबर क्षेत्रकरहाटक येथील समस्त ब्रह्मवृदा कडे रवाना मिति आषाढवा॥ ७ शके १७८१ सिध्धार्थीनामसवत्सरे
                                                   गोविंद हणमत कारभारी नि।। श्री
                                                         सस्थान करवीर
बार अक २५ सन १२६९ फसली

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